Sunday, September 21, 2008

" एक - लड़की "



"अधरों पर अन गिनत, फूलो की लाली,,,
हाथ में संजोये, पूजन की थाली,,,
मन में समेटे, खुशियाँ अपार,,,
तन पर लपेटे, चांदनी सा श्रृंगार,,

मंद-मंद मुस्कुराई सी एक लड़की,,,
हाँ, कल पास आयी थी एक लड़की.....

चेहरा कुदरती, आलोकित चिराग,,,
वो दिल पर कहर थी, या थी आफताब,,,

पाँव रखते ही छा गयी बहार,,,
मन से छट गया, तन्हा अन्धकार,,,

खुदा का करम, रहनुमाई सी लड़की,,,
हाँ, कल पास आयी थी एक लड़की,,,

हिरनी की तरह, लुभावनी चाल,,,
सावन की घटा से,बिखरे हुए बाल,,,

आँखें तराशी, हु-ब-हु प्रसून,,,
छटा बिखरी, मन बसा शकुन,,,

नजरे झुकी, शरमाई सी एक लड़की,,,
हाँ, कल पास आयी थी एक लड़की...

क्षितिज पर सागर सा, समतल ललाट,,,
मदमाता यौवन, भवरों की बाट,,,

सर से पाँव तक, नूर से भरी थी,,,
जन्नत से उतरी, कोई हूर की पारी थी,,

गागर में सागर, भर लायी थी एक लड़की,,,
हाँ, कल पास आयी थी एक लड़की..................."

Monday, September 8, 2008

***""नूर बरसेगा""***


***""नूर बरसेगा""***


तेरे रुखसार से जब नूर बरसेगा ,,,,


सुनहली चांदनी को कोन तर्सेगा,,,


तेरी जुल्फ के अंधियारे की,,,


कहीं पर जब बात होगी...


अमा की रात की वहाँ पर...


भला औकात क्या होगी...


तुम्हारे जलवों पर जब हर शख्स हर्षेगा..


सुनहली चांदनी को कोन तर्सेगा....


तुम्हारे पैर की पायल,,,


तनिक भी छनक जायेगी,,,


लता के गीत की मादक ,,,


भनक-सी उसमे आएगी,,,


तुम्हारे नयन चंचल से कहर बरसेगा,,,


सुनहली चांदनी को कोन तर्सेगा ...


जम्हाई गर जो तुम लोगी,,,


पुरवाई बहक जायेगी,,,


अंगडाई तुमने जो ली,,,


शरद क्या पास आएगी,,,,


"जीत" का व्यथित मन बहक जायेगा,,,


फीर सुनहली चांदनी को कोन तर्सेगा....


तेरे रुखसार से जब नूर बरसेगा ,,,,


सुनहली चांदनी को कोन तर्सेगा...