
"अधरों पर अन गिनत, फूलो की लाली,,,
हाथ में संजोये, पूजन की थाली,,,
मन में समेटे, खुशियाँ अपार,,,
तन पर लपेटे, चांदनी सा श्रृंगार,,
मंद-मंद मुस्कुराई सी एक लड़की,,,
हाँ, कल पास आयी थी एक लड़की.....
चेहरा कुदरती, आलोकित चिराग,,,
वो दिल पर कहर थी, या थी आफताब,,,
पाँव रखते ही छा गयी बहार,,,
मन से छट गया, तन्हा अन्धकार,,,
खुदा का करम, रहनुमाई सी लड़की,,,
हाँ, कल पास आयी थी एक लड़की,,,
हिरनी की तरह, लुभावनी चाल,,,
सावन की घटा से,बिखरे हुए बाल,,,
आँखें तराशी, हु-ब-हु प्रसून,,,
छटा बिखरी, मन बसा शकुन,,,
नजरे झुकी, शरमाई सी एक लड़की,,,
हाँ, कल पास आयी थी एक लड़की...
क्षितिज पर सागर सा, समतल ललाट,,,
मदमाता यौवन, भवरों की बाट,,,
सर से पाँव तक, नूर से भरी थी,,,
जन्नत से उतरी, कोई हूर की पारी थी,,
गागर में सागर, भर लायी थी एक लड़की,,,
हाँ, कल पास आयी थी एक लड़की..................."






4 comments:
bahut hee khoobsorat
गागर में सागर, भर लायी थी एक लड़की,,,
हाँ, कल पास आयी थी एक लड़की..................."
उम्र के इस मोड़ की कल्पनाएँ चंचल लड़की की तरह ही
अलमस्त,अल्हड , बेपरवाह-सी हैं,
आँखों की खूबसूरती काव्य में सिमट आई है-
बहुत अच्छा लगा इन एहसासों को पढना......
सौन्दर्य को बखूबी गढा है.
दिल खुश कर दिया
Post a Comment