Wednesday, February 11, 2009

विश्वास



"भेज पांखुरी गुलाब की,
तुम सारा मधुमास दे गए...

एक प्रष्ठ ही पड़ा तुम्हारा,
तुम सारा इतिहास दे गए..

तुमसे कभी मिल नहीं पाया,
इसकी नहीं कोई शिकायत...

जितना दूर रहा तुमसे,
तुम उतना विश्वास दे गए... "




18 comments:

Vinay said...

हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है


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गुलाबी कोंपलें

पी के शर्मा said...

बेहद खूबसूरत रचना
छोटी है लेकिन
विशाल है

MAYUR said...

आप हिन्दी में लिखते हैं. अच्छा लगता है. मेरी शुभकामनाऐं आपके साथ हैं,

shama said...

Bohot sundar...zindageeme kitnaa zaroor hai wishwaas.

मुकेश कुमार तिवारी said...

जीतेन्द्र,

एक और इन्दौरी का मिल जाना नेट पर मजा आ गया. वैसे लिखा बहुत ही अच्छा है.

जितना दूर रहा तुमसे,
तुम उतना विश्वास दे गए... "

मुकेश कुमार तिवारी

Udan Tashtari said...

हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका हार्दिक स्वागत है. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाऐं.

इस्लामिक वेबदुनिया said...

हमारी भी शुभकामनायें

अभिषेक मिश्र said...

सुंदर कविता, स्वागत.

ज्योत्स्ना पाण्डेय said...

ब्लॉग जगत में आपके शुभ आगमन पर हार्दिक बधाई .............

sandhyagupta said...

Sundar abhivyakti.

bijnior district said...

हिंदी लिखाड़ियों की दुनिया में आपका स्वागत। खूब लिखे। बढि़यां लिखे। हजारों शुभकामनांए।

Amit Kumar Yadav said...

प्रकृति ने हमें केवल प्रेम के लिए यहाँ भेजा है. इसे किसी दायरे में नहीं बाधा जा सकता है. बस इसे सही तरीके से परिभाषित करने की आवश्यकता है. ***वैलेंटाइन डे की आप सभी को बहुत-बहुत बधाइयाँ***
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'युवा' ब्लॉग पर आपकी अनुपम अभिव्यक्तियों का स्वागत है !!!

रचना गौड़ ’भारती’ said...

बहुत सुंदर रचना है
भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
लिखते रहि‌ए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
www.zindagilive08.blogspot.com
आर्ट के लि‌ए देखें
www.chitrasansar.blogspot.com

अमिय प्रसून मल्लिक said...

...bahut hi kam shabdon mein bahut hi badi baat keh gaye sarkaar! aapko pataa bhi hai ki aap kya likh de rahe hain!!!!!!!!!

परमजीत सिहँ बाली said...

अपने मनोभावों को बहुत सुन्दर शब्द दिए है।बधाई।

गोविंद गोयल, श्रीगंगानगर said...

achchha laga. narayan narayan

दिलीप कवठेकर said...

आपका स्वागत.

अगली पोस्ट के इन्तज़ार में..

दिलीप इन्दौरी..

Unknown said...

खुबसुरत पंक्तियां