
"भेज पांखुरी गुलाब की,
तुम सारा मधुमास दे गए...
एक प्रष्ठ ही पड़ा तुम्हारा,
तुम सारा इतिहास दे गए..
तुमसे कभी मिल नहीं पाया,
इसकी नहीं कोई शिकायत...
जितना दूर रहा तुमसे,
तुम उतना विश्वास दे गए... "
तुम सारा मधुमास दे गए...
एक प्रष्ठ ही पड़ा तुम्हारा,
तुम सारा इतिहास दे गए..
तुमसे कभी मिल नहीं पाया,
इसकी नहीं कोई शिकायत...
जितना दूर रहा तुमसे,
तुम उतना विश्वास दे गए... "






18 comments:
हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है
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गुलाबी कोंपलें
बेहद खूबसूरत रचना
छोटी है लेकिन
विशाल है
आप हिन्दी में लिखते हैं. अच्छा लगता है. मेरी शुभकामनाऐं आपके साथ हैं,
Bohot sundar...zindageeme kitnaa zaroor hai wishwaas.
जीतेन्द्र,
एक और इन्दौरी का मिल जाना नेट पर मजा आ गया. वैसे लिखा बहुत ही अच्छा है.
जितना दूर रहा तुमसे,
तुम उतना विश्वास दे गए... "
मुकेश कुमार तिवारी
हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका हार्दिक स्वागत है. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाऐं.
हमारी भी शुभकामनायें
सुंदर कविता, स्वागत.
ब्लॉग जगत में आपके शुभ आगमन पर हार्दिक बधाई .............
Sundar abhivyakti.
हिंदी लिखाड़ियों की दुनिया में आपका स्वागत। खूब लिखे। बढि़यां लिखे। हजारों शुभकामनांए।
प्रकृति ने हमें केवल प्रेम के लिए यहाँ भेजा है. इसे किसी दायरे में नहीं बाधा जा सकता है. बस इसे सही तरीके से परिभाषित करने की आवश्यकता है. ***वैलेंटाइन डे की आप सभी को बहुत-बहुत बधाइयाँ***
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'युवा' ब्लॉग पर आपकी अनुपम अभिव्यक्तियों का स्वागत है !!!
बहुत सुंदर रचना है
भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
लिखते रहिए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
कविता,गज़ल और शेर के लिए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
www.zindagilive08.blogspot.com
आर्ट के लिए देखें
www.chitrasansar.blogspot.com
...bahut hi kam shabdon mein bahut hi badi baat keh gaye sarkaar! aapko pataa bhi hai ki aap kya likh de rahe hain!!!!!!!!!
अपने मनोभावों को बहुत सुन्दर शब्द दिए है।बधाई।
achchha laga. narayan narayan
आपका स्वागत.
अगली पोस्ट के इन्तज़ार में..
दिलीप इन्दौरी..
खुबसुरत पंक्तियां
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