
पुष्प जो लगा बालों मैं
तो किसी का श्रृंगार बन गया,
अगर गया किसी मंदिर मैं
तो पूजन का आधार बन गया,
धागे में पिरोया
तो किसी का सम्मान बन गया,,
और खुद को बिखेर कर
मुक्ति यात्रा का हमराह बन गया,,
पर हर इंसान को कहाँ
ऐसा सुख मिल पाता है,,
कोई गुलाब की तरह
सुशोभित होकर जीता है
और कोई कांटे की तरह
पुष्प को एकटक देखता है
और उसी की चाहत मैं
जहाँ से रुखसत हो जाता है
जीत_इन्दौरी
तो किसी का श्रृंगार बन गया,
अगर गया किसी मंदिर मैं
तो पूजन का आधार बन गया,
धागे में पिरोया
तो किसी का सम्मान बन गया,,
और खुद को बिखेर कर
मुक्ति यात्रा का हमराह बन गया,,
पर हर इंसान को कहाँ
ऐसा सुख मिल पाता है,,
कोई गुलाब की तरह
सुशोभित होकर जीता है
और कोई कांटे की तरह
पुष्प को एकटक देखता है
और उसी की चाहत मैं
जहाँ से रुखसत हो जाता है
जीत_इन्दौरी






13 comments:
पर हर इंसान को कहाँ
ऐसा सुख मिल पाता है,,
कोई गुलाब की तरह
सुशोभित होकर जीता है
और कोई कांटे की तरह
पुष्प को एकटक देखता है
और उसी की चाहत मैं
जहाँ से रुखसत हो जाता है
.......
bahut hi gahri,kdwi sachchaai hai,bahut hi badhiyaa..
jeet ji ,aapney bahut hi sunder kavita likhi hai....bhaav bahut achhey hain...aapki kavita padhtey hi mujhey `pushp ki abhilasha'kavita ki yaad aa gayi parantu aapney usko aagey badhatey huey bahut hi emotional mod diya hai...yun hi likhtey rahiye...meri shubhkaamnayein aapke saath hain....dhanywaad...
सुन्दर रचना...!!
good yar jeet is kaveeta ke bahut gahre arth hain......realy tumhari soch ko salam karta hu................
bahut scchi baat bhai bahut hi accha likha hai..........
Bohot dinon baad aapke blog pe aayee hun...rashana itnee sachhee lagee,ki, bina daad diye raha nahee gaya!
http://kavitasbyshama.blogspot.com
http://lalitlekh.blogspot.com
Sorry, "rachana" ke badle "rashana" type ho gaya...
shama
bahut achchi rachna....!
hey nice work!
जीत जी ,लिखना क्यों छोड़ दिया-? इंदौर शब्द की कशिश मुझे आपके ब्लाक तक खीच लाइ -'-मेरे अरमान मेरे सपने ' पर आए --आपका स्वागत हे इन्तजार रहेगा ---
mei ......र कोई कांटे की तरह
पुष्प को एकटक देखता है mei se hu. :)
bahut hi achha likha h.
nice creation jeet ji
अप्रतिम
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